Today’s Blog on Importance of Hindi by Guiding Guru..Ms. Aunradha Sehgal, PRT

 



                                                             हिंदी भाषा का महत्व -

हिंदी ने हमें विश्व में एक नई पहचान दिलाई है। हिंदी विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। विश्व की  प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा होने के साथ-साथ हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा भी है। विद्यार्थी हमारी भाषा और संस्कृति को जानने के लिए हमारे देश का रूख कर रहे हैं। एक हिंदुस्तानी को कम से कम हिंदी तो आनी ही चाहिए साथ ही हमें हिंदी का सम्मान करना सीखना होगा।

 हिंदी दिवस  - 

हिंदी हिंदुस्तान की भाषा है। मातृ‌भाष किसी भी देश की पहचान और गौरख होती है। इस के प्रति प्रेम और इसका सम्मान करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। इसीलिए हम 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। 

 सांस्कृतिक पहचान -

हिंदी भाषा भारत की समृद्ध संस्कृति का हिस्सा है। यह न केवल हमारी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है, बल्कि हमारी परंपराओं, गीतों, और कहानियों को भी संजोए हुए है। हिंदी साहित्य, विशेषकर कविता और कथा साहित्य, ने भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है।




 सामाजिक समरसता -

हिंदी विभिन्न जातियों, धर्मों और संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य करती है। यह एक ऐसा माध्यम है जो लोगों के बीच संवाद स्थापित करने में मदद करता है, जिससे सामाजिक समरसता और सामंजस्य बढ़ता है। हिंदी ने अनेकता में एकता की भावना को मजबूत किया है।

वैश्विक स्तर पर पहचान -

हिंदी की लोकप्रियता केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है। कई देशों में हिंदी भाषा की पढ़ाई हो रही है, और हिंदी फिल्मों और संगीत ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रचार किया है। इससे भारत की पहचान और भी मजबूत हुई है।

हिंदी की वर्तमान स्थिति - भारत में  - 

हिंदी भारत संघ की राजभाषा होने साथ-साथ ग्यारह राज्यों और तीन संघ  शासित क्षेत्रों भी प्रमुख भाषा है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ हिंदी को एक विशेष स्थान प्राप्त है। वर्तमान में हमारे देश के अधिकांश सरकारी व गैर सरकारी संगठनों को काम-काज की भाषा हिंदी है।




संघर्ष

हम अपने बच्चों को शुरू से ही हिंदी भाषा की न सिखाकर दूसरी बच्चों भाषा सिखाते हैं। आज हिंदी की वर्तमान दशा का एक महत्वपूर्ण कारण सरकार की भाषानिती भी है। इसके कारण ही हिंदी का सरकारीकरण हुआ है और वह मात्र अनुवाद की भाषा बनकर रह गई है।

समाधान - 

हिंदी बच्चों को बचपन से वर्णों को सिखाया जाए। सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं में हिन्दी को अनिवार्य किया चाहिए। हिंदी में ही होना चाहिए। हिंदी जाना पत्र व्यवहार न जानने वाले कर्मचारियों को हिंदी की शिक्षा दी जानी चाहिए। विदेश से आने वाले लोगों को हिंदी सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए

निष्कर्ष

हिंदी भाषा का महत्व न केवल भाषाई दृष्टिकोण से, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक है। इसे संजोना और बढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस समृद्ध विरासत का लाभ उठा सकें। हिंदी को अपनाना, इसका सम्मान करना और इसे आगे बढ़ाना हमारे लिए आवश्यक है।




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